प्रतिष्ठा #fictionwriting #fridayfotofiction

प्रतिष्ठा

कितना फर्क़ है दोनों माँओं में

एक वो  माँ थी जो कूड़े के ढेर में फेंक गयी थी मुझे , और एक यह माँ है जो इतने सुंदर खिलौनों से सजे पालने में मुझे लेटाकर झूले दे रही है I

एक वो माँ थी जो मेरे पैदा होते ही मुझे देखकर रोने लगी व मुझे कोसने लगी  थी I

और एक यह माँ है जो मुझे देख  देखकर मुस्कुराती रहती है और कलेजे से लगाकर दुयाएँ देती रहती है ।

एक वो माँ थी जो मुझे कलंक समझती थी और एक यह माँ है जिसने मेरा नाम प्रतिष्ठा रखा है ।

भगवान जाने  असली माँ कौन है मेरी ?

Linking this post with Tina and Mayuri for #fridayfotofiction

9 Replies to “प्रतिष्ठा #fictionwriting #fridayfotofiction”

  1. In both case we can see the inner of a women but the one who left is also because of some rude behavior of the society .Giving birth and leaving it is also due to the pressure of our families .




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