Are we really proud of Hindi ? #promotehindi

ज्योति है ऊर्जा है , ज्ञान का श्रृंगार है

हिंदी वो भाषा है जिससे हम सबको प्यार है

सुनने  में तो यह बहुत बढ़िया पंक्तियाँ हैं पर क्या वाकई में हम सबको हिंदी से प्यार है ? क्या हम हिंदी का प्रयोग करते समय अपने को गर्वित महसूस करते हैं ? या केवल अंग्रेजी का प्रयोग ही हमको उच्च स्तर पर महसूस करवाता है ?

hindi divas

अगर बच्चे के स्कूल में PTM  हो तो कई बार बच्चो को यह कहते हुए पाया गया है ” मम्मा, आज आप मत आना स्कूल मेरे टीचर से मिलने , पापा को भेजना , क्यूंकि वहां  सिर्फ इंग्लिश में बात करनी  allowed  है ”  I  ऐसा सुनकर मन सोचने पर मजबूर होता है  कि अगर कोई हिंदी में बात करता है तो क्या उसकी personality में कोई कमी आ जाती है क्या ? भाषा तो केवल एक माध्यम है न एक दूजे से अपने विचार साझा करने का ?

अगर किसी पार्टी या फंक्शन में गए हैं तो भी आप कई बार सचेत होकर रहते हैं कि आपको इंग्लिश में बात करनी है चाहे आप उसमे सहज महसूस करें या न करें  I  ऐसा क्यों होता है ? अगर कोई बात अंग्रेजी में कही जाये तो उसका अच्छा प्रभाव पड़ता है और अगर वही बात हिंदी में बोल दी जाये तो शायद कुछ लोगों को हम अनपढ़ प्रतीत होने लगते हैं I

 

मुझे कई बार ऐसा महसूस तब हुआ जब मैं हिंदी में ब्लॉग लिखती हूँ I अगर मेरी blogpost  का title ही हिंदी में है तो शायद कई लोग उस पर click करना भी मुनासिब नहीं समझते I जाने क्यों ? क्या हिंदी में बोलना या लिखना कोई त्रुटि (flaw ) है ?किसी प्रकार का खोट है ?  अगर यह  सचमुच  खोट है तो ऐसा मधुर खोट तो सब भारतीयों में होना ही चाहिए I

 

राष्ट्रभाषा के बिना राष्ट्र गूंगा है I .......... महात्मा गाँधी

14 सितम्बर 1949  को भारतीय संविधान में हिंदी भाषा को राष्ट्रभाषा का सम्मान दिया गया था  I  इसीलिए  14  सितम्बर को हिंदी दिवस के तौर पर मनाया जाता है  I  पर चलिए सिर्फ हिंदी दिवस पर ही नहीं बल्कि बाकि दिनों पर भी हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा दें I

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पर आजकल हमारा जीवन , हमारा रहन  सहन इस प्रकार का हो गया है कि  अंग्रेजी हमारे अंदर  काफी हद तक बस चुकी है  I  हम चाहकर भी पूर्ण रूप से हिंदी hindi  में विचार विमर्श नहीं  कर  पाते हैं  I    अंग्रेजी  हमारे अस्तित्व का ही अंश बन चुकी है  I  यह सारी पोस्ट लिखते समय भी मैंने इसमें कई अंग्रेजी के शब्द लिख दिए होंगे I

 

एक बार जब एक  English  medium स्कूल में हिंदी दिवस मनाया जाना था तो अध्यपिका  विद्यार्थियों को समझाती हैं ” डिअर स्टूडेंट्स ,  आपको पता है आज कौन सा डे है ? आज  Hindi Day  I  इसलिए आज सारा दिन  हम सब हिंदी लैंग्वेज में ही बात करेंगे , ओके गोट इट ?  विद्यार्थी जवाब देते हैं ” येस मैडम ” …….तो देखा आपने हिंदी दिवस मनाने के समय भी हिंदी के ऊपर अंग्रेजी हावी होती नज़र आ रही है  I

तो चलिए ,   हम  बात चाहे  जिस भी भाषा में करें पर  अपनी प्यारी हिंदी भाषा को उसका गौरवपूर्ण दर्जा देकर रखें  I अपनी राष्ट्रभाषा का सम्मान करना न भूलें  I  अपनी हिंदी भाषा का प्रयोग करके गौरवान्वित  व् प्रभावशाली महसूस करें  I

जिस देश को अपनी भाषा और साहित्य के गौरव का अनुभव नहीं है , वो उन्नत नहीं हो सकता I ..... डॉ. राजेंद्र प्रसाद

# I am taking my Alexa rank to next level with #Myfriendalexa

 

Author: Monika

Hi, I am Monika, a teacher by profession and a part time blogger by interest. I share my thoughts about life here at AluBhujia . You can find my thoughts in Hindi as well as English language. To me , life is love, life is helping each other & learning from each other.

9 Replies to “Are we really proud of Hindi ? #promotehindi”

  1. This reminds me of my Hindi mam who Speak very good hindi. She always says” kripya shyam path ki aoor dekhiye” And because of her efforts that I learn difficult words of Hindi very easily There is need to support hindi in any way we can. Love this post

  2. I always try to talk to my daughters in Hindi – the Day to Day conversations. They will anyways be introduced to English once they are in school, but I don’t want them to loose touch with our national language. Loved your thoughts on the subject.

  3. This is a very relevant post. I know of people who make it a point to talk in English to waiters in restaurants and then continue their rants in Hindi among friends. It is ridiculous. (I do not have a hindi translator on my system, otherwise I would have loved to comment on this post in hindi)

  4. Meri mummy Sanskrit ki adhyapika hain aur main ek copywriter jiska zyadatar kaam Angrezi se safal hota hai. Hindibhashio ko lekar jo logo ki soch hai uspar ghar me aksar hi behes hoti hai, achhi wali, aur nateeja har bar yahi nikalta hai — Kuchh bhav bas apni matribhasha me hi behtar vyakta hote hain. Shuru shuru me ajeeb lagta tha Hinid bolne me office me, log meri kabiliyat par prashan chihnn laga dete the, par ab sabhi ko pata hai ke mera Hindi-prem mushkil se zyada ek vardaan hai. Mummy aur papa dono ne hi yahi sikhaya hai ke apni jado se sharm mat karna, dheere se samajh se aya, pr aa gya. Aur ab dheere dheere ye aas pas walo ko bhi samajh aa raha hai k taaliyon ki koi bhasha nahi hoti.
    Agar sabhi aise hi apni baat par adey rahe aur sharm ki bajay apni boli par garv mehsus kare, to Hindi ko matribhasha aur rashtrabhasha wali izzat milne lagegi. Ye sab manasikta ka khel hai aur kuch nahi.
    Aap bhi dati rahiye. Jo English ko “support” karte hain, wo wahi mudd jayenge jahan veyg hoga. Agar Hindi ki orr veyg badhega, to wo sab bhi peechhe peechhe aa jayenge. Tab tak, Tomi Ekla Cholo re!

    1. आपके सराहनीय शब्दों के लिए बहुत बहुत धन्यवाद सच बात है की कुछ भाव अपनी मातृभाषा में ही सुंदरता से व्यक्त हो पाते हैं …कुछ भाव होते ही ऐसे हैं जिनके बारे में मन पहले मातृभाषा में ही सोचता है फिर चाहे उनका अनुवाद हम बाद में किसी अन्य भाषा में कर दें ……चलिए अपनी जड़ों का साथ न छोड़ें और न ही शर्म महसूस करें …. आपकी माता जी को मेरा दिल से प्रणाम

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