निर्जला एकादशी–आध्यात्मिक व् वैज्ञानिक दृष्टिकोण

आज 5 जून 2017  को निर्जला एकादशी का पर्व मनाया जा रहा है …..एक साल में 24 एकादशियाँ होती हैं….ज्येष्ठ मास के शुकल पक्ष की एकादशी को निर्जला एकादशी के नाम से जाना जाता है ….

आध्यात्मिक  दृष्टिकोण:—

हिन्दू धर्म में एकादशी के दिन उपवास(व्रत) रखने की परम्परा है …..सभी एकादशियों में से निर्जला एकादशी सबसे महत्वपूर्ण मानी गयी है …कहते हैं की अगर आप सभी एकादशियों का उपवास नहीं कर सकते तो सिर्फ एक निर्जला एकादशी का उपवास रखकर आप सभी एकादशियों जितना पुण्य प्राप्त कर सकते हैं ….इस दिन दान पुण्य की विशेष महत्ता है …सारा दिन भगवन विष्णु की पूजा की जाती है और द्वादशी के दिन विष्णु भगवान का स्मरण करके उनको भोग लगाके उपवास संपन्न होता है

एकादशी को माधव तिथि के नाम से भी जाना जाता है …अर्थात वो तिथि जो माधव(भगवन श्री कृष्णा ) को समर्पित है…….इस दिन के उपवास में सभी प्रकार के अन्न व् दालों से परहेज किया जाता है …..

हमारे हिन्दू धर्म में कई त्यौहार हैं जो तिथियों के अनुसार मनाये जाते हैं….जैसे अक्षय तृतिया , गणेश चतुर्थी, नाग पंचमी, राधा अष्टमी, राम नवमी, विजय दशमी ,और फिर एकादशी…

एकादशी उपवास के दिन हमें हर प्रकार से भगवन माधव के समीप रहने का प्रयास करना है ….उनकी पूजा , उनका कीर्तन ,भगवन की कथा पढ़कर व् दूसरों को सुनाकर ,उनका हर पल ध्यान करके हम उनके समीप रहने का प्रयास कर सकते हैं….. साल में एक दिन तो कर ही सकते हैं…
एकादशी के दो प्रकार से अर्थ समझाए गए है :—

1 . एकादश का अर्थ होता है 11वां ….तो एकादशी उपवास का अर्थ हुआ 11 वें दिन पर उपवास

2 . एकादश का अर्थ होता है 11वां , उपवास शब्द के उप का अर्थ है समीप (पास) और वास का अर्थ होता है रहना …..तो एकादशी उपवास का अर्थ हुआ की सभी 11 इन्द्रियों से भगवान माधव के समीप रहना

वैज्ञानिक दृष्टिकोण (New Scientific approach towards fasting) :—-

आजकल हम सबने बड़ी बड़ी पढ़ाईआं  जो कर ली तो कोई भी काम करने से पहले दिमाग उसका scientific logic मांगने लगता है ….उपवास करना है ….क्यों करना है …किसने कहा है …..क्या होगा उपवास से ? …इत्यादि

उपवास के बारे में पहले भी कई scientific evidences  दिए गए हैं पर कुछ  latest research  अनुसार निचे दिए points  को ध्यान से पढ़िए

  1.   Telomere :हमारे शरीर की संरचना में cells और DNA का ख़ास role है ….DNA हमारे शरीर में ख़ास तरह की instructions लेकर चलते हैं…हर DNA के रेशे के endparts पर एक ख़ास किस्म की टोपी लगी होती है जो DNA को दोनों तरफ से protect करती है ….यानि की एक कवच का काम करती है  …..बिलकुल उसी तरह जैसे जूतों के तस्मों के endparts पर प्लास्टिक की टोपी लगी होती है

ये जो DNA के endparts पर टोपी लगी है इसको कहते है Telomere ….. हर बार जब हमारे शरीर के सेल्स अपने आप में multiply होते हैं तो इसके साथ साथ हर बार Telomere छोटे होते जाते हैं ….और अगर सुरक्षा देने वाला कवच ही छोटा हो जायेगा तो हमारे शरीर के cells जल्दी बूढ़े होने लगेंगे और ठीक से काम करना बंद कर देंगे ….इसलिए जितने Telomere छोटे होते जायेंगे …..उतना ही हमारी हेल्थ पर  negative  प्रभाव पड़ेगा और
उतनी ही जल्दी उम्रवृद्धि होगी यानि हम बुढ़ापे की और जल्दी अग्रसर होंगे

तो साइंटिस्ट्स ने खोज की और ध्यान दिया की Telomeres की घटती लम्बाई को किसी तरह से रोका जा सकता है या वापिस बढ़ाया जा सकता है या नहीं …तो उन्होंने खोज में ये पाया की Telomeres की लम्बाई को दुबारा बढ़ाने के लिए कई चीज़ें की जा सकती है जैसे की अपना weight ठीक रखना ,exercise करना और fasting करना ……तो ये है उपवास करने का scientific reason

2.  Autophagy :
जापान के डॉ. Yoshinori Ohsumi को Autophagy पर research करने के लिए nobel prize दिया गया है            …….Autophagy का अर्थ है “self-eat” …… यानि की ऐसी प्रक्रिया जिसमे शरीर अपने ही पुराने , खराब व्           क्षतिग्रस्त हुए सेल्स को खा लेता है ……..जब हम उपवास करते हैं तो Autophagy की प्रक्रिया शुरू हो जाती है …….इससे         हमारे शरीर को पुराने व् खराब सेल्स से छुटकारा मिल जाता है और शरीर को सुचना भी मिल जाती है की उसे नए cells बनाने के लिए काम शुरू करना है ……….

Researches बताती हैं की अगर हम हर 15 दिन बाद एक 36 घंटे का उपवास करें तो हमारे शरीर में नए सेल्स का विकास ठीक प्रकार से होता रहेगा और हम बुढ़ापे की और जल्दी अग्रसर भी नहीं होंगे

ये बात तो हमारे वेदों में हज़ारों वर्ष पहले ही बता दी गयी थी ….हर 15  दिन बाद  36  घंटे का उपवास मतलब एकादशी उपवास ……अब आप पूछेंगे ये 36 घंटे कैसे हुए ? दशमी की रात से एकादशी की रात तक हुए 24 घंटे और एकादशी की रात से द्वादशी की सुबह तक 12 घंटे तो कुल हो गए 36 घंटे

इस तरह एकादशी उपवास की महत्ता ये हुयी की हर 15  दिन बाद 36  घंटे का उपवास आपके शरीर को तंदुरुस्त रखेगा और जो समय आप उपवास के बहाने भगवान्  के दिव्य चिंतन में बिताएंगे वो आपकी आत्मा को शक्ति व् शांति प्रदान करेगा

जय श्री कृष्णा

 

Monika

Hi, I am Monika, an educationist for the last 17 years and a mom to a daughter for the last 11 years . Give me a hot cup of masala tea with some snacks plus a laptop and I am happy ! My Blog is a mixed bag of my observations ,learnings and experiences . To me , life is love, life is helping & learning from each other. Life is not that complex -We just have to stop overthinking .

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1 Response

  1. Anita Khanna says:

    Nice information. These things are so pricise .

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